क्रियाचोर युवक
आबक नव नवतार छौरा सब तs फैसन में तते ने चूर रहैत छथि जे की कहू |आब अहू सब सोचैत हाब जे इ कहियो रहल छैथ आ पुछैत छथि जे की कहू ? हे नै यौ सज्जनवृन्द हम फुसि नै बजलहु एकर पांछा एकटा छोट छीन घटना हमरा एहि बेर गाम गेला पर दृष्टिगोचर भेल तैं कहलहु| ओना हम बुझी रहल छि जे इ गप्प किछु लोक के कटोंझ लगतैन, तत्पश्चात हम एहि घटनाक वर्णन करबाक हेतु अतीउत्सुक छि | भेल ऐना जे —- एहि दीपावली में हम गेल रही गाम, गाम गेनू सबटा तs बड नीक मुदा रवि दिन रहै हमर एकटा दोस्त एला आ कहैत छैथ जे भाई चलू कनि गाछी स घुमने आबई छि | आब पहिले ओहि दोस्त के बारे में किछु जानकारी द देल जा – हुनकर नाम रहैं घनश्याम मिश्र, आब ओ कोनो मिश्र रहैथ अप्पन सब के की बिगारि लेता यौ , तैं नाम स नै डेराऊ |ओ दिल्ली स गाम दिवाली मनाब आइल रहैथ हुनकर बाबूजी कहलखिन- बौआ जाऊ कनि गाछी देखने आब जे कमोट करs बला भs गेलै वा नहि , भs गेल हेतई तs कनि कs देबे |आब मिश्रा जी हमरा साथे विदा भेला| गाछी पहुंचला – ओतs मुश्किल सs १० टा गाछ रहल हेतई , ओ सोचला हमही कमोट कs दै छियै |आब कनि हुनक पोशाक पर ध्यान देल जा—- ऊपर उज्जर रंग के कमीज निचा एकदम तनल पतलून कमर में खाली गमछा रहैं| आब ओ खुरपी लेला आ लगला कमौट कर| गामक माटी पानी में खेलल छौरा भइयो क २ टा मात्र २ टा गाछ कमोट करबा में ओ भाई घाम सs नहा गेला |हम कहलियैन भाई छोरी दियौ अहन सs नै हात , से ओ किया मानता आब तs इज्जत के सवाल भ गेलैन| हम उम्हर सs हटि क कनि दोसर जगह टहलि देलौ,बगल में मंदिर छल, दर्शन क आधा घंटा बाद अबै छि तs हुनक हालत देखि कs हंशी छुटि गेल — हुनक शरीर पर वस्त्र के नाम पर मात्र गमछा दृष्टिगोचर भ रहल छल| आ निचा में बैश क कराहि रहल छला | हम पुछलीयें की भेल यौ ? हुनक जवाब छल – भाई आब हम काने पकरै छि जे खेत – खलिहान दिस जाब, हुनका हाथ स शोणित के धारा बही रहल छल | कारन जे हुनक अंगूठा पर खुरपी के तेज धार अपन कमाल देखा चुकल छल| जेना तेना हुनक प्राथमिक उपचार क घर पहुँचलौ|
मुदा धन्य छथि आजूक नवयुवक वर्ग आ हुनक नव फैसन |