सर्वप्रथम हम राजीव मिश्र MithilaBlog.com के तरफ सs नमस्कार करैत छि, आ संगहि अहाँ सब पाठकवृन्द हेतु मंगल कामना कs रहल छि |हम पहिले एहि साईट के बारे में किछु व्यक्त करबाक आज्ञा चाहैत छि — ओना तs एहि वेबसाइट के नामे में एकर व्याख्या संहित अछि , तत्पश्चात इ एकटा एहन जगह अछि जतs हम सभ मिथिलांचल वासी अपन मुनक बात लिखी सकैत छी आ अपन विचार सs सभ गोटे के अवगत करा सकैत छी| क्षमा करब आब कनि विषय वस्तु पर एबाक चाही — गाम घर में देखैत हेबई जे किछु उलांक जकरा हम सब उद्दंड सेहो कही सकैत छियै, छौरा सब होइत अछि | एहिना हमरा गाम में सेहो किछु सज्जन छथि(सज्जन मतलब ऊपर जिनका बारे में बताल गेल अछि)| हम चौक पर ठार रही हमरा बगल में ३ टा बुजुर्ग बैसल छला- नसीब बाबु , कृपा बाबु, तिरपित बाबु | संयोग सs तीनू गोते सहोदर छला | उम्हर सs एकटा सज्जन एला (जिनकर नाम हम नै लेब चाहब नै त माइर भs जात) आ कहै छैथ- यौ राजीव एकटा बात बुझलिया – की ? हमर प्रश्न छल| एह आई त गजब भs गेलै | एहन की यौ ? त ओ खूब जोर सs कहै छैथ नसीब के कृपा सs तिरपित तृप्त भs गेला |
आब तs ओत ठार सब गोटे खिलखिला कs हंसी देलैथ| आ जखने ओई सज्जन के नजर ओई तीनू बुजुर्ग पर परलैन तs हुनकर थोबरा ———- आह देख बला छल |तs एहन होइत अछि आब अप्पन मिथिलांचलक बर बुजुर्ग के संग, चलू एत तक तs ठीक अछि मुदा आब जे एकटा कथानक लिखी रहल छी ओ पढ़ी क अहाँक मून अवश्य उद्वेलित भs उठत —–
हमर घरक बगल में एकटा छथिन्ह हलधर बाबा, अपना समय के मानल विद्वान, एखन हुनक उम्र ८० के आस – पास हात |घर स किछु दूर मुदा हमर मित्र जिनक नाम आलोक छैन के घरक पांछा में एकटा पैघ मैदान छैक |बाबा ओहि मैदान में साँझक समय पोखरि दिस होअ गेला |संयोग एहन जे ओ आलोक के घरक नजदिके में बैसी गेला |आलोक के नजर परलैन |आब हुनका पता नै की फुरेलैन कहै छथिन्ह – बाबा भेल त उठू ने |साँझक समय बाबा के आंखि कमजोर हुनका सुनाई त देलकैन मुदा किछु देखाई नै देलकैन जे के कतs सs बजी रहल अछि? बाबा अनठिया कs फेर पूर्ववत अपन काज करs लगला |कनि देर बाद आलोक फेर कहलखिन्ह बाबा भेल तs उठू ने ! आब बाबा ठार भs गेला आ घूमी – घूमी क आवाजक श्रोत खोजबाक प्रयत्न करs लगला, मुदा हुनका के देखाई देतेन| बाबा फेर बैसि गेला – मुदा आलोक कहाँ मान बला ५ मिनट बाद फेर स अपन वाक्य दोहरेला – बाबा एखन तक नै भेला, भ गेल त उठू ने | आब हलधर बाबा के सब्र टूटी गेलैन ओ अग्निस्च- वायुस्च भ बजला – रे सरवा बंसलोचन भ जात त हम अपने उठी जाब ने |आ विस्फोट करs बला अंदाज में बजला – इ जे बुझैत हेबs जे हम नै देखालियौ से भूल छs |
आ सही में एहि गप्पक सबूत में आलोक के प्रात भेने मिल गेलैन जखन हुनक घर पर उपराग एलैन|
एहन एहन आलोक कतेको होइत छथि जिनका वृद्ध लोकनी के परेशान करबा में वा हुनक खिल्ली उरबा में मज़ा अबैत छैन मुदा कनिको इ नै सोचै छथि जे जिनका पूजा करबा चाही हुनका साथ हम दुर्व्यवहार कs रहल छी |

एकटा श्रवण कुमार छलैथ जे अप्पन वृद्ध माता- पिता के कन्हा पर तीर्थाटन करेला आ एकटा ———- कुमार छैथ

जे ———————

धन्यवाद ,