<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Mithila Blog</title>
	<atom:link href="http://mithilablog.com/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://mithilablog.com</link>
	<description>Just another Mithilablog.com weblog</description>
	<lastBuildDate>Thu, 23 Dec 2010 19:38:17 +0000</lastBuildDate>
	<generator>http://wordpress.org/?v=2.9.1</generator>
	<language>en</language>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
			<item>
		<title>छुतहरबा</title>
		<link>http://mithilablog.com/2010/12/22/%e0%a4%9b%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%be/</link>
		<comments>http://mithilablog.com/2010/12/22/%e0%a4%9b%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%be/#comments</comments>
		<pubDate>Wed, 22 Dec 2010 15:11:57 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Mithila Blog</dc:creator>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://mithilablog.com/?p=16</guid>
		<description><![CDATA[छिटही नामक एकटा पैघ गाम. गाम मे बहुत-बहुत पढ़ल लिखल लोक. पाँच टा  आइ.ए.एस,  सात टा इन्जीनियर आ दर्जनो सरकरी नौकरी करए वाला लोक. मुदा  एत्तेक एत्तेक  बड़का हाकिम लोक सब रहितहुँ भादव महीना मे बाढ़ि केँ रोकए  वाला केओ नहिँ. आ  बाढ़ि एहेन जे नुकसान केवल गरीबे लोक [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>छिटही नामक एकटा पैघ गाम. गाम मे बहुत-बहुत पढ़ल लिखल लोक. पाँच टा  आइ.ए.एस,  सात टा इन्जीनियर आ दर्जनो सरकरी नौकरी करए वाला लोक. मुदा  एत्तेक एत्तेक  बड़का हाकिम लोक सब रहितहुँ भादव महीना मे बाढ़ि केँ रोकए  वाला केओ नहिँ. आ  बाढ़ि एहेन जे नुकसान केवल गरीबे लोक टा केँ करैत. गाम  धनिक-हाकिम लोकनि ते  गामे मे दू मँजिला मकान बनौने छलैथि मुदा गरीब’क सुने  वाला केओ नहि.  प्रत्येक साल बाढ़ि आबए आ गरीब लोकनिक फुसि’क घर केँ उजारि  के चलि जाए. फेर  सरकार’क दिस सँ पाँच सय टाका भेटए. ओहो पाँच सय टाका केवल  कागजे पर. गामक  मुखिया पचास टाका सरपँच तीस टाका असूलैत रहैथि. पिछला साल  सँ मुखिया’क बेटा  ओहि मे सँ पचीस टाका माँगनाई शुरु कऽ देने छल. गाम’क  लोक केँ धमकी देने छल  जे पचीस टाका नहि देला पर बी.डी.ओ साहेब केँ कहि  मुआबजा रोकबा दैत. बचि  खुचि के चारि सय टाका सभ’क हाथ मे आबए.</p>
<p>दुनियाँ सबसँ पैघ अभिशाप  गरीबी होइत छैक आ एकर सबसँ पैघ उदाहरण नौगछिया  वाली छलीह. भगवानो केवल  धनिके लोकऽक सँग दैत छथि. खासतौर पर विपत्ति मे  तऽ जुनि पुछू. सात साल  पहिने नौगछिया वाली’क विवाह धनेसर’क सँग भेल छल.  विवाह’क समय मे तीन बीघा  खेत छलन्हि. पुरे दिन समाँग तोड़लाक बाद साल भर’क  खर्चा निकलि जाइत छलन्हि.  मुदा पिछला किछु साल सँ तऽ बाढ़ि एहेन तबाही  मचौने छल जे नहि पुछु. दू बीघा  खेत मे बालु भरि देने छल. पिछला तीन साल सँ  कोनो खेती नहि भेल छल ओहि खेत  मे. एक बीघा मे खर्चा की चलत कर्जा तऽर मे  धनेसर दबल छलाह.</p>
<p>बात एतबी  रहितेक तऽ कोनो बात नहि. दू साल पहिलुका बाढ़ि मे जे नौगछिया  वाली आ धनेसर  सँग भेल एहेन अन्याय भगवान किनको सँग नहि करथु. दू दू टा  बेटा छलन्हि. एकटा  तीन साल’क आ दोसर एक साल’क. बाढ़ि’क बाद मे पूरे गाम मे  हैजा पसरल छल. ओहि  हैजा मे गाम’क लगभग एक दर्जन लोक एहि दुनियाँ सँ चलि  गेल. बाँकी लोकनि ते  बूढ़ छलैथि मुदा धनेसर’क दुनू बेटा एखन दुनियाँ’क कोनो  मतलबे नहि बुझि पेलक  कि भगवान ओहि दुनू टा के एक्के दिन उठा केँ लऽ  गेलाह.</p>
<p>प्रसव पीड़ा  पूत्र’क वियोग सँ कमजोर पड़ैत छैक. धनेसर दुनू प्राणी इएह  कहैत छलाह जँ  भगवान केँ हमरा पूत्रहीन करबाक छलन्हि ते जन्मे किएक  देल्थिन्ह. बाँझ रहला  पर पुत्र वियोग नहि होइत छैक. अखबार मे, रेडियो मे आ  टेलिविजन मे अनेक नेता  अपन अपन पक्ष दैत छलथिन्ह. किओ भारत सरकार केँ ते  किओ स्थानीय प्रशासन केँ  जिम्मेदार ठहराबैत छलैथि. मुदा धनेसर आ नौगछिया  वाली लेल असली जिम्मेदार  ते केवल भगवाने छलाह. हुनका कखनो ई मोन नहि होइत  छलन्हि जे यदि सरकार बाढ़ि  रोकबाक भरिसक प्रयाक केने रहितैक तऽ हुनका आई ई  दिन नहि देखऽ पड़ितन्हि.  हुनका लेल तऽ बाढ़ि एक विभीषिका थीक जकरा उपर मे  पूर्ण कन्ट्रोल केवल भगवाने  टा के छन्हि. कतेक नेता एहि गाम’क दौरा केने  होयत मुदा एहि दुनू प्राणी  लेल ओकर कोनो मतलब नहि छलन्हि.</p>
<p>समय प्रत्येक घाव’क मलहम होइत छैक.  से धनेसर दुनू प्राणी पर सेहो लागू  भेल. धीरी धीरे पुत्र वियोग सँ छुट्टी  भेटलन्हि. अपन दिनचर्या मे लागि  गेलाह. फेर ओएह खेत ओएह कोदारि ओएह बरद ओएह  गाछी ओएह जलखई. जतेक समय बीतय  दुनू प्राणी अपन सामान्य रुप मे नहुएँ नहुँह  आबए लागलैथि. भगवानो बाट  ताकैत छलथिन्ह. दु:खऽक समय मे कोनो सहायता नहि  देल्थिन्ह. भगवान शायद इएह  नियम बनौने छथि. दुःखऽक समय मे यदि खुशखबरी दऽ  देथिन्ह तऽ दुऽख’क मोल कम  भऽ जेतैक.</p>
<p>सामन्य भेला पर नौगछिया वाली  फेर सँ गर्भवती भेलीह. धनेसर आ नौगछिया  वाली फेर सँ एक हजार सपना देखऽ  लागल्थिन्ह. मुदा हुनकर सपना मे एहि बेर  एकटा खोट छल. मोन शँकित छलन्हि. एक  एक डेग फुकि फुकि के आगू बढ़बैत छलैथि.  समय बीतल आ दुनू प्राणी केँ फेर सँ  पुत्र रत्न’क प्राप्ति भेलन्हि. मानू  खुशी’क फेर सँ कोनो ठिकाना नहि.</p>
<p>मुदा  पूत्र रत्न’क प्राप्ति बादे सगा सम्बन्धी अलग अलग तरह’क सलाह देबऽ   लागलन्हि. किओ कहन्हि जे पिछला बेर कँजूसी के कारण शीतला मैया केँ कुमारि   नहि खुऔला’क कारणे दुनू बच्चा’क नुकसान भऽ गेलन्हि. ते किओ कहन्हि जे   भगवान’क पूजा सही समय पर नहि केलथिन्ह. जतेक तरह’क मुँह ओतेक तरहक सलाह.   शायद गरीब लोकनि के हैजा कोनो बीमारीए नहि बुझा पड़ैत छलन्हि. असल मे   प्रत्येक आदमी’क सोच अपन सीमा मे रहैत छैक. बाढि’क बाद’क हैजा के उपर मे   केवल धनिक आ हाकिम लोकनिक कन्ट्रोल रहैत छैक. गरीबऽक लेल ओ सीमा सँ बाहर’क   वस्तु छल. तेँ बाढ़ि सँ पसरल हैजा केँ किओ दोष नहि दैत छल्थिन्ह. जकर किओ   नहि ओकर भगवाने टा होइत छैक. गरीब’क लेल तेँ भगवाने सब किछु. पुत्र रत्न   भेटलन्हि तऽ भगवान’क कृपा सँ. पुत्र छीनि लेल्कन्हि ते भगवाने के प्रकोप   सँ. किओ कहन्हि जे डाइन’क आँखि लागि गेलन्हि ते किओ कहन्हि जे भूत प्रेत’क   असर थीक.</p>
<p>मुदा एहि बेर धनेसर दुनू प्राणी कोनो तरहक रिस्क नहि लेबऽ  चाहैत छलाह.  तेँ जतेक तरह’क सलाह भेटन्हि ओतेक तरह’क प्रयास करैथि. बच्चा  सेहो दिन  दुना आ राति चौगूना बढए लागलन्हि. एतेक कम उमर मे एत्तेक सुन्दर  सुन्दर  केश, बहुत चाकर माथ, सुग्गा सनक ठोर, ठाढ़ नाक, सब किओ कहन्हि जे  पूर्व  जन्म मे ई बच्चा कोनो राजकुमार छलाह. बच्चा’क प्रत्येक प्रशँशा पर  नौगछिया  वाली दुनू प्राणी आशँकित भऽ जैथि. मुदा नौगछिया वाली केँ सेहो होइत   छलन्हि जे ई बच्चा कोनो राजकुमार सँ कम नहि. बेसी प्रशँसा केला पर धनेसर   हुनका डाँटि दैथि जे सबसँ पहिने बच्चा पर अपन माए के आँखि लागैत छैक.   नौगछिया वाली सेहो आशँका मे अपना आप केँ कन्ट्रोल कऽ लैथि.</p>
<p>पाँचे  महीना मे ई बच्चा गुड़कि गुड़कि चलए लागल. बच्चा जतेक नम्हर होमय  ओतेक सुन्दर  भेल जाए. पाँचे महीना मे बच्चा बाजबाक हर सम्भव प्रयास करए  लागल. बचपन मे  ओकर गतिविधि देखि लागैत छल जे आगु चलि के ओ बहुत मेधावी  होयत. लोक ओहि  बच्चा’क जतेक प्रशँशा करय नौगछिया वाली ओतेक प्रफुल्लित भऽ  जाथि. बात एतबे  नहि, हुनका मोन तरह तरह के सपना अँकुरित होमय लागए.  नौगछिया वाली कखनो सपना  देखैथि जे हुनकर बौआ पैघ भऽ डाक्टर इन्जीनियर  वकील, जज, कमीशनर एक सँग सब  पदवी धारण केने छथि. बच्चा केँ देखि केँ मोन  होइत छलन्हि जे एकर मुँहे बता  रहल अछि जे ई कोनो पैघ हाकिम होयत. ओना ते  प्रत्येक बच्चा अपन माएक लेल पैघ  सँ पैघ हाकिम होइत अछि, प्रत्येक माए-बाप  अपन बेटा केँ डाक्टर इन्जीनियर  बनबे चाहैत छथि, मुदा गाम’क प्रत्येक  लोकनि इएह कहन्हि जे ई बच्चा देखबा मे  अदभूत अछि आ एकर गतिविधि एकर मेधा  केँ देखाबैत अछि. धनेसर आ नौगछिया वाली  लगभग आब बिसरि गेल छलथि जे किछु  समय पहिने हुनका पूत्र हानि भेल छलन्हि.  ओहो एक नहि दू-दू टा एक्के सँगे.  मानव जाति’क इएह विशेषता. एक दू:ख केँ  दोसर सूख खतम कऽ दैत छैक. आ जिन्दगी  चलैत रहैत छैक.</p>
<p>धनेसर प्रतिपल  आशँकित छलाह. मुदा कोनो तरहक विपरीत परिस्थिति सँ लड़बाक  लेल पूर्ण तैयार.  समय बीतय लागल आ बच्चा नम्हर होमय लागल. धनेसर’क घर मे  छओ महीना पूरला पर  बच्चा’क नामकरण सँसकार होइत छल. एहि बात’क चर्चा धनेसर  बहुत गोटा लग केने  छल. ओहि मे किछु लोकनि हुनका सलाह देलकन्हि जे पिछला  बेर बच्चा’क नामकरण  सँस्कार मे कोनो विधि विधान नहि कायल गेल ताहि लेल  भगवती नाराज भऽ गेलीह आ  दू-दू टा बच्चा’क नुकसान भऽ गेलन्हि. एहि बेर  धनेसर दुनू प्राणी केँ पूरे  विध विधान सँ नामकरण सँस्कार करबाक चाही.  पुरोहित केँ बजाए पहिने  सत्यनारायाण भगवानक पूजा आ ओकर बात अगिला दिन  धूम-धाम सँ नामकरण सँस्कार आ  साँझ के भोज.</p>
<p>धनेसर ककरो नाराज करय नहि चाहैत छलाह. सब लोकनिक बात  मानि गेलाह. मोन  भेलन्हि जे जखन एतेक खर्चा हेबे करत ते बड़की मौसी केँ बजा  ली. बेचारी बुढ़  भऽ गेलीह अछि. बुढ़’क आशीर्वाद लेबाक चाही. नहि जानि कोन  तरह’क आशीर्वाद  ककरा कोन तरह सँ लागि जायत आ कोन काल केँ हरि लेत. ई  प्रस्ताव अपन पत्नी  नौगछिया वाली लग राखल गेल. नौगछिया वाली से एहि  प्रस्ताव केँ सहर्ष  स्वीकार कऽ लेलीह.</p>
<p>उम्हर टोल’क एक आदमी के भेजल  गेल जे धनेसर’क मौसी केँ आनल जाए. इम्हर  गाम मे धनेसर तन-मन-धन सँ लागि गेल  जे नामकरण सँस्कार बढ़ियाँ सँ होयबाक  चाही. मुदा टोल’क लोक पुछलकन्हि जे  भोज भात ते हेबे करत मुदा एखन धरि  बच्चा’क की नाम राखल जायत से सोचने छी की  नहि? धनेसर एखन धरि कोनो नाम नहि  सोचने छलाह. मोन मे एक हजार नाम आबैत  छलन्हि मुदा असल नाम की होमय से एखन  धरि तय नहि केने छलथि. टोल’क दोसर लोक  जखन टोकलकन्हि ते मोन पड़लन्हि जे  नौगछिया वाली केँ पुछि नाम पहिने सँ तय कऽ  ली. अपन पुरोहित सँ पुछलथिन्ह,  जवाब भेटलन्हि जे नाम जे राखू मूदा ओ नाम  नामकरण सँस्कार भेला’क बादे सँ  कहल जेतैक. पत्नी सँ जँ पुछल्थिन्ह ते पत्नी  से एक दर्जन नाम गिना  देलकन्हि. मुदा आई दुनू प्राणी एक नाम पर सहमति दऽ  देलखिन्ह जे बच्चा’क  नाम प्रदीप-चन्द्र होएबाक चाही. प्रदीप चन्द्र तऽ  धनेसर केँ से बढ़ियाँ  लागलैन्ह मुदा बुझि नहि सकलाह जे एतेक सुन्दर नाम  हुनका फुड़लन्हि. नौगछिया  वाली कहलकन्हि जे एकर अर्थ होइत छैक चन्द्रमा सनक  एहेन दीप जे सँसार मे  रौशनी पसारि दैथि. नौगछिया वाली लग एतेक दिमाग नहि  छलन्हि कि एतेक सुन्दर  नाम ओ अपना सँ राखि सकैत छलीह. ओ त गाम’क स्कूल’क  मास्टर साहेब छलन्हि जे ई  नामो फुरा देलकन्हि आ ओकर मतलब से बता देलकन्हि.</p>
<p>कोनो  बच्चा’क नाम रखबा मे माँ-बाप अपन पूरा ऊर्जा लगा दैत छथि. बच्चा’क  नाम  केवल नामे टा नहि ओ बहुत किछु होइत छैक. नाम रखबा मे पारिवारिक  सँस्कार,  माता-पिता’क मेधा, आ माता पिता’क दूरदर्शिता सब किछु निहित रहैत  छैक. तेँ,  साबिक मे बहुत लोकनि अपन बच्चा’क नाम दरोगा, ओकील, मुख्तार केवल  एहि लेल  राखैत छलैथि किएक ते हुनकर सपना छलन्हि ओकील मुख्तार बनबाक आ ओ  अपन जीवन मे  ई सब किछु नहि बनि सकलैथि. आब अपन बच्चा’क नाम राखि अपन  अपूर्ण इच्छा के  पूर्ण कऽ लैत छथि. सचमुच बच्चा’क नाम केवल नामे टा नहि  माए बाप’क अपूर्ण  इच्छा केँ द्योतक होइत छैक. प्रदीप- चन्द्र धनेसर आ  नौगछिया वाली’क एहेन  बेटा जे चन्द्रमा जेकाँ मेघ एतेक ऊँच उठि पूरे  दुनियाँ मे रौशान करत.</p>
<p>लिअ  आब नामकरण सँस्कार’क दिन से लऽग आबि गेल. काल्हि नामकरण होयत. दोसर  गाम सँ  धनेसर’क मौसी से आब आबि छलथि. टोल’क लोक से बाट ताकि रहल छथि जे  काल्हि  साँझ के भेज होयत. धनेसर तैयारी मे व्यस्त छलाह. नौगछिया वाली  प्रयास करैत  छलीह जे बच्चा हरदम हुनकर निगरानी मे रहए. मौसी से चेता देने  रहथि जे  स्त्रीगण लोकनि सँ बच्चा नुका केँ राखब, नहि जानि ककर नजर केहेन  खराप हो.  बच्चा केँ ललाट पर आ आँखि मे काजर हरदम लागल हो से मौसी’क विशेष  सुझाव.</p>
<p>देखैत  देखैत साँझ भऽ गेल. नौगछिया वाली, धनेसर आ हुनकर मौसी खाना खा  केँ बौसल  छलैथि. मौसी पुछए लागलथिन्ह जे पिछला दुनू बच्चा’क नुकसान कोना  भेल छल.  धनेसर सब किछु बताबैत छलाह.</p>
<p>ओहि पर मौसी पुछलथिन्ह, “से सब तऽ जे भेल से भगवान’क मर्जी सँ आब ई बौआ’क की नाम राखि रहल छी?”</p>
<p>&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8211;क्रमशः—————–</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://mithilablog.com/2010/12/22/%e0%a4%9b%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%ac%e0%a4%be/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>1</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>ई केहेन प्रेम</title>
		<link>http://mithilablog.com/2010/12/22/%e0%a4%88-%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a5%87%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ae/</link>
		<comments>http://mithilablog.com/2010/12/22/%e0%a4%88-%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a5%87%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ae/#comments</comments>
		<pubDate>Wed, 22 Dec 2010 06:55:53 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Mithila Blog</dc:creator>
				<category><![CDATA[कटौझ]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://mithilablog.com/?p=13</guid>
		<description><![CDATA[
नई दिल्ली स्टेशन पर जखन सुमन जी अयलाह तऽ अपेक्षाकृत बेसी भीड़ छल. ओना  तऽ वैशाली ट्रेन बिहार जेबाक लेल सबसँ महत्वपूर्ण ट्रेन होइत छैक मुदा आई  आन दिन’क अपेक्षा आओर बेसी भीड़ छल. स्कूल कालेज मे गर्मी छुट्टी काल्हिए  शुरु भऽ गेल छल. गर्मी छुट्टी सुमन जी’क लेल सेहो छलन्हि आ [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div>
<p>नई दिल्ली स्टेशन पर जखन सुमन जी अयलाह तऽ अपेक्षाकृत बेसी भीड़ छल. ओना  तऽ वैशाली ट्रेन बिहार जेबाक लेल सबसँ महत्वपूर्ण ट्रेन होइत छैक मुदा आई  आन दिन’क अपेक्षा आओर बेसी भीड़ छल. स्कूल कालेज मे गर्मी छुट्टी काल्हिए  शुरु भऽ गेल छल. गर्मी छुट्टी सुमन जी’क लेल सेहो छलन्हि आ ओ अपन पैत्रिक  स्थान जाइत छलाह. मुदा सुमन जी’क लेल कोनो बेसी परेशानी नहि छलन्हि. दू  महीना पहिने ट्रेन रिजर्वेशन भऽ गेल छलन्हि. भीड़ सँ हुनका केवल ताबय धरि  परेशानी छलन्हि जाबय धरि अपन कोच एस-६ मे बैसि नहि जाथि. राधिका से ओएह  ट्रेन सँ जेबाक लेल टिकट लेने छलीह आ बाद मे वरुण’क प्रोग्रम से बनि  गेलन्हि. क्रमशः तीनो लोकनि मिलि अपन अपन गाम जेबाक लेल एस-६ मे बैसि गेल  छलैथि.</p>
<p>ओना तऽ प्रत्येक गर्मी छुट्टी मे सुमन जी गाम जाइत छलाह. किओ पुछन्हि तऽ  ई नहि कहैथ जे गाम जा रहल छथि. ओ इहो नहि कहैथ जे अपन बुढ़ दादा-दादी सँ  भेँट करबाक लेल जाइत छथि. अपितु हुनका ई कहबा मे नीक लागन्हि जे ओ आम खेबाक  लेल गाम जा रहल छथि. जाबय धरि पटना मे छलाह ताबय धरि प्रत्येक मास गाम  पहुँचि जाथि मे दिल्ली तँ दिल्ली छल. साल मे एक्के बेर गाम जाइत छलाह. इएह  प्रत्येक गर्मी’क छुट्टी मे. कोसी कात मे बसल हुनकर गाम मे गर्मी कम से  लागन्हि आ आम खेबाक मौका अलग सँ. दुनियाँ दोसर भाग मे आम’क महत्व शायदे  एत्तेक भऽ सकैत अछि. देश प्रदेश सँ लोक केवल आम खेबाक लेल गाम जाति छथि.  केवल एतबे नहि किछु लोक तऽ एहेन होइत छथि जे जाइत छथि कोनो काज सँ आ नाम  आम’क लगा दैत छथि. नवकनियाँ केँ नैहर एहि लेल जेबाक छन्हि जे हुनका आम  खेबाक छन्हि. धिया पुता अपन मामा गाम एहि लेल जेताह जे हुनका आम खेबाक  छन्हि. नवकनियाँ सासूर’क जिम्मेदारी वा अपन माँ बाबूजी सँ भेँट करय नहि  जेतीह, धिया-पूता लोकनि पढ़ाई लिखाई छोड़ि मामा गाम मे मस्ती करय नहि जेताह  ओ सब लोकनि आम खेबाक लेल जेताह. जे नवकनियाँ आम’क समय मे नैहर नहि जा  सकलीह हुनकर सासूर’क लोक उलहन दऽ दैत छन्हि, &#8220;हिनका माए बाप केँ आमक गाछ  अछि ? जे आम खेबाक लेल जेतीह?&#8221;. कोनो वर के विवाह सँ पहिने आम’क गाछ एक  कसौटी होइत अछि. मतलब ई जे अमूक वर केँ एत्तेक कलमी आम छैक आ एत्तेक बीजू.  कुल मिलाँ केँ प्रत्येक लोकक अपन अपन स्वार्थ मुदा बीसाइत आम’क सिर पर. नहि  जानि आम खेबा’क बहाना सँ कतेक स्वार्थ’क पूर्ती भेल अछि. आम’क सिर बिसाबैत  ओ हजारोँ स्वार्थी लोक मे सुमन जी एकटा अभिन्न आदमी छलाह जे अपन स्वार्थ’क  पूर्ती’क हेतु आमक सिर बिसेलैथि.</p>
<p>ट्रेन अपन वेग सँ जा रहल छल. सुमन जी घर सँ खाना आनने नहि छलैथ तेँ  ट्रेन’क पेन्ट्री पर आशा छलन्हि. ट्रेन’क खाना हुनका अपेक्षाकृत बेसी नीक  लागैत छलन्हि तेँ चिकेन पराठा आर्डर कए देलथिन्ह. राधिका आ वरुण अपन आदत  अनुसार दालि भात तरकारी खेलथिन्ह. राधिका तऽ बढ़िये सँ खाना खेलीह मुदा  वरुण केँ नहि तऽ दालि भात तरकारी वा नहिएँ चिकेन परोठा मे कोनो विशेष रुचि  छलन्हि. राधिका हुनका खाना खेबाक क्रम मे काएक बेर टोकल्कन्हि मुदा हुनका  उपर मे कोनो विशेष फर्क नहि पड़लन्हि. हमेशा’क तरह वरुण अनठेने छलैथ.  राधिका’क आग्रह हुनकर अपन जिद्द के सोझाँ मे नहि चलि सकल. अन्त मे राधिका  तमसा के कहने छलथिन्ह, &#8220;रात को भूख लगेगी तो कुछ नही मिलेगा&#8221;. वरुण तैयो  स्तब्ध छलैथि. आ हुनकर बाडी लैन्गूएज एहेन कहैत छल जे ओ खेबा पीबा मे बहुत  शौकीन किस्म के लोक छथि आ ट्रेन’क ई गन्दा खाना मे हुनका कोनो अभिरुचि नहि  छन्हि. मुदा राधिका बाडी लैन्गूएज एहेन कहैत छल जे नहि खायब तऽ पछताएब.  सुमन जी केँ होइत छलन्हि जे राधिका बिना मतलब के वरुण’क आव भगत करैत छथि.  जिनका भूख लागतन्हि ओ अपने खेताह ओहि मे राधिका के जिद्द सँ कोन फायदा?.  मुदा ओ एहि मे राधिका के कोनो गलती नहि दैत छलाह. हुनका लागैत छलन्हि जे  वरुणे नाटक कऽ रहल छथि. आ राधिका स्त्री जाति होयबाक कारणे सबहक चिन्ता  अपने उपर नेने छलीह.</p>
<p>सुमन जी केँ पिछला समय याद आबय लागलन्हि. राधिका हुनका सँ कतेक प्रेम  करैत छलीह. ओना तऽ आई काल्हुक समय मे कोनो दोसर आदमी केँ फुर्सते नहि भेटैत  छन्हि. मुदा कनियोँ फुर्सत भेला पर राधिका हुनकर कतेक ख्याल राखैत छलीह.  मुदा जहिया सँ वरुण राधिका’क जीवन मे प्रवेश कयलन्हि सब किछु बदलि गेल.  राधिका’क वरुण सँ नजदीकी सुमन जी केँ फुटलो आँखि नेहि सोहाइत छलन्हि. कएक  बेर सुमन राधिका सँ पुछि चुकल छलाह जे की ओ हुनका सचमूच के प्रेम करैत छथि.  आ प्रत्येक बेर राधिका हुनका उत्तर दऽ देने छलीह, जे ओ एखनो सिर्फ सुमने  जी टा सँ प्रेम करैत छथि. सुमन जी राधिका सँ कएक बेर पुछि चुकल छलाह जे  हुनका कोनो प्रोब्लेम नहि हेतन्हि, ई जानि के जे ओ आब हुनका सँ नहि बल्कि  केवल वरुण सँ प्रेम करैत छथि. मुदा प्रत्येक बेर राधिका’क इएह जवाब छलन्हि  जे किछुए दिनक बात अछि ओ वरुण सँ दूर भऽ जेतीह. राधिका’क ई बीच वाला खेल  सुमन जी केँ बिल्कूल नहि पसन्द आबि रहल छलन्हि. आ नहि जानि राधिका वरुण मे  कोन एहेन चीज देखैत छलीह जे सुमन जी सँ दूरी बना लेने छलीह. मुदा कोनो दोसर  फैसला लेबय सँ पहिने ओ देखय चाहैत छलाह जे राधिका’क झूठ’क सीमा की अछि?.  राधिका केँ ओ पूरा टाइम देबय चाहैत छलाह जे बात मे हुनका कोनो अफसोस नहि  रहि जान्हि. ओ राधिका’क &#8220;किछुए दिन&#8221; केँ देखय चाहैत छलैथ जे ओ दिन आयत  जहिया ओ वरुण सँ बहुत दूर भsऽ जेतीह. वा पूर्ण रुप सँ आस्वस्थ होमय चाहैत  छलाह जे एहेन दिन कहियो एबो करत वा नहि. हुनका मोन मे एक सय बात चलैत  छलन्हि मुदा ओ किछु बाजलाह नहि.<br />
अमावाश्याक अन्हरिया राति मे ट्रेन खटर खटर के आवाज करैत तीव्र वेग सँ जा  रहल छल. ट्रेन वेग मे कखनो एक दिस झुकि जाइत छल तऽ कखनो दोसर दिस. पटरी  जोड़ पर कखनो जोर सँ आवाज होइत छल तऽ कखनो सर्रर.. सँ निकलि जाइत छल. बाहर  सँ आबैत टटका हवा सँ गर्मी’क बिल्कूल अनुभव नहि होइत छलन्हि. कखनो दूर कोनो  गाम मे बिना बिजली’क खपरैल घर मे जरैत लाल्टेन पर सुमन जी’क ध्यान चलि  जाइत छलन्हि. कखनो खिड़की सँ कोनो भगजोगनी कम्पार्टमेन्ट मे घुसि जाइत छल अ  कनि देर इम्हर उम्हर केलाक बाद फेर सँ बाहर चलि जाति छल. कखनो छोटका सन  स्टेशन पर कोनो छोटका सन स्टेशन मास्टर बड़का सन ग्रीन लाइट के देखबैत छलाह  आ जाबय धरि सुमन जी एहि दृश्य केँ नीक जेकाँ देखतथि ताबय धरि ओ स्टेशन  बहुत पाछू छुटि जाइत छल. चलैत ट्रेन सँ श्टेशन के देखनाई सुमन जी केँ बच्चे  सँ नीक लागैत छलन्हि. विशेष रुप सँ श्टेशन मास्टर’क ग्रीन लाइट.<br />
बाहर देखैत देखैत ओ मूल बात केँ बिसरि जाति छलाह. मुदा जखने वरुण दिस ध्यान  जाइत छलन्हि मोन फेर सँ तामसेँ घोर भऽ जाइत छलन्हि. वरुण हिनका दिस टटकी  लगा केँ देखैत छलाह मुदा तामसेँ सुमन जी हुनका दिस देखतो नहि छलाह. कखनो  कखनो राधिका हिनका दिस देखैत छलीह तऽ सामान्य सन मुस्की इहो दऽ दैत छलाह. ओ  कोनो भी कीमत पर राधिका’क मोन नहि दुखबे चाहैत छलाह. मोन मे एत्तेक उपराग  भेलाक बादो राधिका’क केँ आभाष होमय नहि देबय चाहैत छलाह जे हुनकर हृदय’क  स्थिति की छन्हि. तेँ नहिँ चाहितोँ हुनका मुँह पर मुस्की आबि जाइत छलन्हि.  राधिका’क मुँहपर सुमनजी’क मुस्की सँ सँतुष्टि’क भाव आबैत छलन्हि. प्रतिपल  सुमन जी केँ ओ सन्तुष्टि बेमानी लागैत छलन्हि, मुदा अन्हरिया राति मे कोनो  दोसर उपायो नहि छलन्हि.</p>
<p>गाड़ी ओहिना अपन वेग सँ जा रहल छल. बाँकी यात्री मे हँसी ठहाका होइत छल,  मुदा राधिका, वरुण आ सुमन जी स्तब्ध छलैथि. खिड़की लग मे राधिका बैसल छलीह  आ हुनकर बगल मे वरुण आ गैलरी’क दोसर दिस साइड वाला नीचला बर्थ पर सुमनजी  असगरे बैसल छलाह. सुमनजी’क ध्यान अन्हार राति मे खिड़की लग बैसल राधिका’क  दिस जखन गेलन्हि तऽ राधिका’क पैघ पैघ आँखि बिजुली सन चमैक जाइत छलन्हि. गौर  वर्ण, चाकर चेहरा आ अनन्त दिस ताकैत पैघ पैघ आँखि. शैम्पू काएल केश हुनकर  गाल पर आबि जैत छलन्हि मुदा किछुए देर मे मई महीना’क बयार फेर सँ आबि केँ  वापस लऽ जाइत छलन्हि. आँखि मे कोनो भाव नहि छलन्हि. बिल्कूल निरीह आ नीरव.  मुदा सुमन जी केँ ओ दृश्य बढ़ियाँ लागैत छलन्हि. बिल्कूल कञ्चन, कमनीय,  कल्पना लोक मे विचरण करए वाला.</p>
<p>राधिका केँ बाँकी सहयात्री सँ कोनो बातचीत नहि भऽ रहल छल. राधिका देखबा  मे बहुत सुन्दर आ नवयूवती छलीह आ बाँकी सहयात्री मे कोनो दोसर स्त्री नहि  छल. बाँकी लोक कोनो सुन्दर यूवती सँ फराके रहला मे बुद्धिमानी बुझैत  छलथिन्ह. सुन्दर यूवती सँ बात केला सँ नहि जानि दोसर लोक की बुझत. राधिका  पढ़ल लिखल छलीह आ ओएह कम्पार्टमेन्ट मे बाँकी लोक कोन कोन मसला पर बात करैत  छलाह मुदा राधिका ओहि मे हिस्सा नहि लैत छलीह. तेँ दोसर ग्रूप सँ हिनका  लोकनि के कोनो बातचीत नहि भऽ रहल छलन्हि. नहि जानि बाँकी लोक की बुझत. तेँ  एखनि धरि बाँकी लोकनि हिनका तीनो लोकनि सँ कोनो बातचीत नहि केने रहैथि.  शायद सुमन जी केँ सेहो नीके लागैत छलन्हि. ओ खुदे नहि चाहैत छलाह जे कोनो  आन लोक राधिका सँ बात करय. तेँ ओहि कम्पार्ट्मेन्ट के बाँकी लोक हिनका तीनो  लोकनि केँ फुटा देने छलन्हि. ई ओएह राधिका छथि जे अपन कालेज मे कोनो भी  वाद विवाद प्रतियोगिता केँ छोडैत नहि छलथीन्ह बल्कि ओहि मे अव्वल रहैत  छलीह. मुदा नहि जानि किएक एखन रियल टाइम डिसकशन मे हिस्सा किएक नहि लऽ रहल  छलीह. राधिका अपन जीवन’क बेसी समय दिल्ली मे बिताओने छलीह. हमेशा सँ स्त्री  पुरुष के बराबरी के अधिकार’क वकालत करैत एलीह मुदा एहेन मौका पर हुनका की  भऽ जाइत छन्हि से नहि जानि. स्त्री पुरुष के बराबरी के अधिकार वाला  यूरोपीयन बात मे नहि जानि कोना भारतीय स्त्री’क मूल्य समाहित होइत छल. बात  एतबी टा नहि छल. हिनका तीनो लोकनि मे सेहो बातचीत नहि भऽ रहल छलन्हि. शायद  तीनो लोकनि मे तीनो लोकनि एत्तेक नजदीक भेलाक बावजूदो एहेन लागैत छल जे  कोनो जान पहचान नहि छलन्हि. कखनो कखनो अपन मूल्य आ अपना आप केँ चिन्हबाक  लेल शाँति’क जरूरत होइत अछि. भीड़ मे बजला सँ लोक अपना आप के बिसरि जाइत  छथि. शाँति भेटला पर आ चुप रहला पर लोक अपना आप सँ बात करैत अछि आ इएह काज ई  तीनो लोकनि सेहो करैत छलथिन्ह.</p>
<p>ट्रेन तीव्र गति सँ अन्हरिया केँ चीरैत भागि रहल छल. हिनका तीनो लोकनि  केँ ध्यान तखने भँग भेलन्हि जखन हिनकर ध्यान ट्रेन’क बाँकी सहयात्री भँग  केलथिन्ह. हिनका लोकनि केँ एक सज्जन पुछल्थिन्ह, &#8220;अब रात ज्यादा हो गई है  अब बिस्तर लगा लेते हैँ&#8221;. तीनो लोक एक्के सँग स्वीकृति दऽ देलथिन्ह.</p>
<p>चादर बिछा केँ सुमन जी सेहो सुति रहल छलाह. राधिका हुनका बीच वाला बर्थ  पर सुतय लेल कहल्थिन्ह आ राधिका खुद साइड मे नीचा वाला बर्थ पर सुति रहलीह.  मुदा हुनका नीन्द नहि आबैत छलन्हि. अपन ध्यान अपन सहपाठी दिस लगेबाक  प्रयास करैत छलथिन्ह मुदा बारम्बार ध्यान वरुण’क गतिविधि पर टिक जाइति  छलन्हि. जहिया सँ वरुण राधिका’के जिन्दगी मे आयल तहिया सँ हुनकर दुनियेँ  बदलि गेलन्हि. नहि जानि राधिका वरुण मे कोन एहेन चीज देखैत छलीह जे सुमन जी  सँ दूरी बना लेने छलीह. फुसियोँ के आँखि मुनि केँ सुमन जी अपना आप के  बहलेबाक प्रयास करैत छलाह जे नीन्द आबि जान्हि मुदा एना सम्भव नहि भेलन्हि.  कम्पार्टमेन्ट मे एक बुजूर्ग सहयात्री जोर सँ फोँफ काटैत छलाह जाहि सँ  हिनकर सुतबाक प्रयास हरदम असफल भऽ जान्हि. एक बेर हुनकर सुतबाक प्रयास सफल  भेले छलन्हि कि ओएह बोगी मे दूर मे कोनो बच्चा कानि उठल. ओ फेर सँ उठि  गेलाह.</p>
<p>आब ओ सोचि नेने छलाह जे ओ सुतबका प्रयास नहि करताह. ओ केहुनी भरेँ  कनपट्टी केँ हाथ पर टिका केँ ओ अन्हरिया राति मे आँखि खोलि के खिड़की’क  बाहर देखबाक प्रयास करैत छलाह. बारम्बार करऽट लैत छलाह. अन्हरिया राति मे  ओएह अनन्त दिस ताकैत छलाह. बीचला बर्थ पर सुतल रहला सँ पँखा’क गरम हवा टा  लागन्हि मुदा रहि रहि केँ बाहर’क बयार आबि जान्हि आ हिनकर अनन्त दिस ताकनाई  सफल भऽ जान्हि. इएह क्रम मे नहिँ जानि कखन हिनकर आँखि लागि गेलन्हि.</p>
<p>सुमन जी सुतल रहलाह. कतेको स्टेशन पर गाड़ी रुकल, कतेक छोटका स्टेशन पर  छोटका सन स्टेशन मास्टर बड़का सन ग्रीन लाइट देखबैत पाछू छुटि गेलाह. कतेक  बेर बाहर’क बयार हिनका छुबि केँ चलि गेलन्हि. कतेक बेर राधिका उकासी केलीह.  कतेक जोर सँ बुजूर्ग सहयात्री फोँफ काटैत रहि गेलाह मुदा ओ सुतल रहलाह.  हुनकर नीन्द तखने खुजलन्हि जखन वरुण’क आवाज कान मे सुनाई पड़लन्हि. वरुण  राधिका सँ कहि रहल छलाह जे हुनका जोर सँ भूख लागल छन्हि. सुमन जी के बुझल  छलन्हि जे ई वरुणमा राति मे नाटक जरूर करत. साँझ मे हुनका कतेक कहल गेल  छलन्हि जे खा लिअ मुदा ओ किनको नहि सुनलाह. सुमन जी किछु नहि बजलाह.</p>
<p>सुमन जी केँ होइत छलन्हि जे राधिका राति के अनठा देतीह. ओ वरुण केँ  छोड़ि देतीह. ओ बहाना मारतीह जे भोर मे किछु जलखई कऽ लेब. मुदा जे देखलैथि ओ  हुनका अधनीना सँ पूर्ण जगा देलकन्हि. राधिका उठि चुकल छलीह. वरुण हुनकर  लऽग मे बैसल छलाह. राधिका बिना लाइट जलौने बैग मे किछु ताकि रहल छलीह.  हुनका लोकनि केँ होइत छलन्हि जे सुमन जी सुतले छलाह. मुदा ओ तऽरे आँखि सब  किछु देखि रहल छलैथ. राधिका स्टील’क एकटा टिफिन निकालैथि. ओहि टिफिन मे  किछु खेबाक लेल सामिग्री छल. वरुण पड़ि रहलाह. राधिका हुनका चम्मच सँ खुआ  रहल छलीह. वरुण’क मुड़ी राधिका’क कोरा मे छलन्हि. एखन वरुण एक्को बेर नहि  मना करैत छलाह जे हुनका नीक नहि लागैत छन्हि. गटागट सब किछु अन्दर केने जा  रहल छलाह.<br />
अन्हरिया राति केँ चीरैत ट्रेन तीव्र वेग सँ जा रहल छल. बीच वाला बर्थ पर  अनठेने सुमन जी सब किछु देखि रहल छलाह. हुनका राधिका’क उपर मे कोनो विश्वास  नहि रहि गेल छलन्हि. राधिका’क बात’क कोनो मोल नहि. राधिका अपन घर सँ  वरुण’क खेबाक लेल बना के आनने छलीह. ई बात हुनका सँ नुकौने किएक छलीह.  राधिका केँ जँ वरुण एत्तेक प्रिय लागैत छलन्हि तऽ ओ एक्के बेर मे मानि किएक  नहि लैत छलीह. किएक हुनका आश्वासन पर आश्वासन दैत छलीह. हुनकर ध्यान फेर  सँ ओहि दुनू लोकनिक दिस गेलन्हि. राधिका चम्मच लऽ केँ वरुण’क खाना वरुण’क  मुँह मे देने जा रहल छलीह. एखनो धरि वरुण’क माथ राधिका’क कोरे मे छलन्हि.  राधिका रहि रहि केँ सुमन जी’क दिस टोहि लऽ लैथि जे कहीँ हो न हो ओ जागल  हेताह. मुदा सुमन जी एना अनठेने छलाह जे राधिका पूर्ण आस्वस्थ छलीह जे सुमन  जी सुतले छथि. मुदा तऽरे आँखे सुमन जी सब किछु देखि रहल छलाह. ओ देखलैथ जे  राधिका’क खुलल शैम्पू काएल केश वरूण’क माथ पर आबैत छलन्हि. वरुण केश’क ओहि  लट केँ अपन कँगूरिया आँगूर मे गोल गोल फँसबैत छलाह आ ओकर बात नहुँए नहुँए  खीचैत केश केँ खोलि दैत छलाह. एना केला पर राधिका हुनका अगिला चम्मच खाना  देबा सँ पहिने मुस्किया दैत छलीह. राधिका केँ वरुण’क नौटँकी पर कोनो एतराज  नहि छलन्हि.<br />
आब सुमन जी सँ बर्दाश्त नहि भऽ रहल छलन्हि. हुनकर कोँढ़ फाटय लागलन्हि. ओ  सोचय लागलाह, वरुणक राधिका’क जीवन मे एला सँ पहिने हुनकर जीवन कतेक बढ़ियाँ  छल. राधिका एहिना हुनका लेल स्पेशल खाना बना केँ आनैत छलीह आ सुता केँ अपन  कोरा मे हुनकर माथ लऽ के चम्मच सँ खुआबैत छलीह. तऽरे तऽर हुनका मुँह सँ  आवाज निकललन्हि, &#8220;ई वरुणमा जे नऽ करय&#8221;. मोन मे बहुत तामस उठि रहल छलन्हि.  मोन मे होइत छलन्हि जे चीकरि केँ राधिका केँ पुछैथ जे इएह थीक अहाँक  आश्वासन. इएह थीक अहाँक सप्पत. मोन होइत छलन्हि जे जा केँ वरुण’क गाल पर  जोर सँ एक चाँटा मारैथ आ भगा दैथि हुनका. फेर होइत छलन्हि ई अन्हरिया राति  मे चलैत ट्रेन मे कोनो सीन क्रिएट करय सँ बढ़ियाँ अछि जे सब हिसाब भोरे  सुति केँ लेल जाए.<br />
फेर कखनो मोन मे होइत छलन्हि जे राधिका केँ लऽग मे जाकेँ कहैथ, &#8220;अहाँ हमरा  बुरबक बुझैत छी?, बहुत दुनियाँ हमहुँ देखने छी, अहाँ हमरा सँ नुका केँ  वरुण’क लेल अलग सँ खाना बना के आनने छी, कोरा मे सुता के हुनका खुआ रहल  छिअन्हि तकर मतलब हमरा नहि बुझल अछि?&#8221;.</p>
<p>सुमन जी क&#8217; मोन में त&#8217; बहुत किछु अबैत छलैन,मुदा अपन मुखारबिंदु स किछु उगालि नहीं रहल छला| किछु छनक पश्चात ओ देखै छैथ जे वरुण राधिका&#8217;क कोर में हुनक लट स खेलैत- खेलैत सुइत रहला| आब त हुनका होइन जे या त इ चलैत ट्रेन स अपने कूदी जाई वा अकरा दुनु गोटे के धकेल दी |मुदा हाई रे पुरुषत्व&#8221; अपन इज्जत बचबा हेतु ओ फेर अपना अंतर्मन स लरला आ विजय प्राप्त केला |ट्रेन के सब यात्री पूर्ववत बिना कोनो आवाज केने फोंफ कटैत छला | ट्रेन अपन वेग स चलल जा रहल छल, वातावरण में निस्तब्धता व्याप्त छल, आब राधिका सेहो वरुण के केश में हाथ फेरैत- फेरैत माँ निद्रा देवी&#8217;क आगोश में चलि गेल छली|सुमन जी सेहो कुहित भेल नींद खीच&#8217; लगला|</p>
<p>सुमन जी के घड़ी भोर के ८ बजा रहल छलैन, सूर्य देवता के तीव्र रौशनी स जखन ट्रेन&#8217;क पूरा बोगी जगमगा लागल तखन हुनक नींद टूटल तखन देखैत छैथ जे ट्रेन छपरा में रुकल अछि, चाय वाला सब &#8220;चाय बोले चाय&#8221; डिरिया रहल अछि, ओकरा रोकी ३ टा चाहक आर्डर देल्खिंह|निचला बर्थ दिसि देखि बजला &#8220;राधिका उठू चाह पिबू&#8221; &#8211; मुदा इ की राधिका टा छैथे ने! ऊपर देखला वरुणमो पार !! आब हिनक करेज धक् रहि गेल |कहीं इ दुनु हमरा सुतले छोरी भागि त ने गेल ! मोन में तरह-तरह के विचार आब&#8217; लगलैन| चाय बला के पाय द&#8217; विदा केला| निचा उतरि लोक सब स पुछ्लाथि सब कहैं हम एखने उठ्नौ हा | बोगी स बहार निकलला आस-पास के बोगी में छान मारला| ने राधिका आ ने वरुणमें भेटलैन|</p>
<p>थाकि-हारि क&#8217; पुनः शीट पर आबी बैस रहला, मुदा मोन विचलित भ उठल छलैन सोचला एहन जिन्दगी जी क&#8217; की करब&#8217; &#8211; इ वरुणमा हमरा कतौ के नहि छोरलक,कोनो इज्जत नहि रह&#8217; देलक पता नहि दुनु कत&#8217; रंगरेली मना रहल हात| नहि आब हमरा जिब&#8217; के कोनो अधिकार नहि अछि| इ सोचि सुमन जी बोगी स निकलि गेट पर चलती ट्रेन स कूदी अप्पन इहलीला समाप्त कर&#8217; लेल एलैथ|<br />
सुमन जी&#8217;क बाम पैर पायदान स निचा, दहिना पैर उठब&#8217; बला छलैथ की पाछा स एकटा नारिक मधुर स्वर कान में परलैन- &#8220;अहाँ कखन उठ्लौ&#8221; |इ त और केऊ नहि सुमन जी के प्राणों स प्रिये राधिका&#8217;क स्वर छल,जकरा नहि पाबि अपन जीवन समाप्त कर&#8217; जा रहल छला |<br />
सुमन जी अकचका उठला आ धर्फराहट में गिरैत- गिरैत बचला| हकलैत बजला &#8211; अ हम यह कनी देर पहिले उठ्लौ, अहिं के खोजै छलौ कत&#8217; गेल रही ?राधिका बजली- s2 में चतरिया वाली चाची चथिंह हुनके फ़ोन आइल छलैन त पता चलल जे ओहो एही ट्रेन स घर जा रहल छैथ तैं सोचलू जे भेंट क आबी, अहाँ के सुतल देख्लौ तैं नहि जगेलौ|<br />
राधिका&#8217;क मधुर बोल सुनि रातिक सब गुस्सा रफूचक्कर भ&#8217; गेलैन|तखनहि सुमन जी के वरुण दृष्टिगोचर भेलैन, आब त ओ अग्निस्च- वायुस्च भ&#8217; ओकर कॉलर पकरि मुंह पर २ -३ घूसा रशीद क देलखिन्ह| जब तक लोक सब अबितई वरुण के नीक माइर लगी चुकल छलैन| मुंह स शोणित क धार बह&#8217; लगलैन लोल फुटि गेलैन| वरुण स्तब्ध भ&#8217; सुमन जी&#8217;क मुंह लगातार देखि रहल छला|जेना पूछी रहल होइथ -हमर की गलती छल? जे ऐना माल-मवेशी जका पीट देलौ |आब राधिका स बर्दास्त नहि भेलैन- इ अहाँ के की बिगारने छला जे एहन बर्ताव हिनका साथ केलियैन ! इ सवाल हुनकर सुमन जी स छलैन|ताबैत बोगी में के सब यात्री हो-हल्ला सुनि जमा भ गेल छला|लोक के देखि सुमन जी कन्नी काटैत बजला घर चलू त बतबैत छि ! मुदा राधिका कियक मानती &#8211; जे बाजबाक अछि अत&#8217;बाजु| आब सुमन जी बफरि उठला &#8211; अहाँ सब जे सोचैत हब जे हम किछु नै बुझाई छि से भूल अछि |की- की गुल खिल्बैत छि से हम नै बुझै छि &#8211; प्यार हमरा साथे आ रंगरेली इ वरुणमा के सार साथै |&#8221;ई केहेन प्रेम&#8221; |<br />
आई अहाँ फैसला क लिय&#8217; कोनो एगो नाव पर पैर राखु |<br />
आब राधिका के बारी छलैन &#8211; बिच में वरुण मूकदर्शक बनल छला आ मुंह स आबि रहल शोणित के रोकबाक भारिशक कोशिश क रहल छला | राधिका सेहो अपन मौन तोरली &#8212; अहाँ एहन सोचियो केना सकैत छियै, हमर अहाँक प्रेम त अटूट अछि अहाँ हमरा पर शक करैत छि, हम वरुण के अपन भाई मानैत छियैन| छि: हमरा मालूम रहिता जे अहाँ एहन सोचब त हम कहियो वरुण अत नै आब दितियाई| जाई रिश्ता में शक कनियो अपन जगह बनेलक ओ टूटल बुझु |<br />
सुमन जी के आब अपन गलती&#8217;क एहसास भेलैन, ओ वरुण आ राधिका स क्षमायाचना कर&#8217; लगला| वरुण हुनका क्षमा करैत बजला &#8211; कोनो बात नहि इ अहाँ दुनु गोटेक बीच भेल ग़लतफ़हमी के वजह स भेल मुदा आगा स याद रखब &#8211; मून में जे रहा ओ प्रकट क ली अन्यथा ओ पैघ घाव के रूप ल लैत छैक|<br />
सुमन जी आब राधिका स लिपटी परला आ आगा स कहियो शक नहि करबाक वादा केलैथ|ट्रेन अपन गंतव्य स्थान पर पहुंची चुकल छल,यात्री सब अपन सामान समेतैत बाजी उठला &#8211;</p>
<p>!!!&#8212;&#8212;-  <em> <strong>ई केहेन प्रेम</strong></em>&#8212;&#8212; !!!</p>
</div>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://mithilablog.com/2010/12/22/%e0%a4%88-%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a5%87%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ae/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>क्रियाचोर युवक</title>
		<link>http://mithilablog.com/2010/12/22/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%b0-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%95/</link>
		<comments>http://mithilablog.com/2010/12/22/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%b0-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%95/#comments</comments>
		<pubDate>Wed, 22 Dec 2010 05:09:30 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Mithila Blog</dc:creator>
				<category><![CDATA[समस्या]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://mithilablog.com/?p=9</guid>
		<description><![CDATA[
आबक नव नवतार छौरा सब तs फैसन में तते ने चूर रहैत छथि जे की कहू &#124;आब  अहू सब सोचैत हाब जे इ कहियो रहल छैथ आ पुछैत छथि जे की कहू ?  हे नै यौ  सज्जनवृन्द हम फुसि नै बजलहु एकर पांछा एकटा छोट छीन घटना हमरा एहि बेर गाम  गेला [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div>
<p>आबक नव नवतार छौरा सब तs फैसन में तते ने चूर रहैत छथि जे की कहू |आब  अहू सब सोचैत हाब जे इ कहियो रहल छैथ आ पुछैत छथि जे की कहू ?  हे नै यौ  सज्जनवृन्द हम फुसि नै बजलहु एकर पांछा एकटा छोट छीन घटना हमरा एहि बेर गाम  गेला पर दृष्टिगोचर भेल तैं कहलहु| ओना हम बुझी रहल छि जे इ गप्प किछु लोक  के कटोंझ लगतैन, तत्पश्चात हम एहि घटनाक वर्णन करबाक हेतु अतीउत्सुक छि |  भेल ऐना जे &#8212;- एहि दीपावली में हम गेल रही गाम, गाम गेनू सबटा तs बड नीक  मुदा रवि दिन रहै हमर एकटा दोस्त एला आ कहैत छैथ जे भाई चलू कनि गाछी स  घुमने आबई छि | आब पहिले ओहि दोस्त के बारे में किछु जानकारी द देल जा &#8211;  हुनकर नाम रहैं घनश्याम मिश्र, आब ओ कोनो मिश्र रहैथ अप्पन सब के की बिगारि  लेता यौ , तैं नाम स नै डेराऊ |ओ दिल्ली स गाम दिवाली मनाब आइल रहैथ हुनकर  बाबूजी कहलखिन- बौआ जाऊ कनि गाछी देखने आब जे कमोट करs बला भs गेलै वा नहि  , भs  गेल हेतई तs कनि कs देबे |आब मिश्रा जी हमरा साथे विदा भेला| गाछी  पहुंचला &#8211; ओतs मुश्किल सs १० टा गाछ रहल हेतई , ओ सोचला हमही कमोट कs दै  छियै |आब कनि हुनक पोशाक पर ध्यान देल जा﻿<span style="text-decoration: line-through">&#8212;- </span>ऊपर उज्जर  रंग के कमीज निचा एकदम तनल पतलून कमर में खाली गमछा रहैं| आब ओ खुरपी लेला आ  लगला कमौट कर| गामक माटी पानी में खेलल छौरा भइयो क २ टा मात्र २ टा गाछ  कमोट करबा में ओ भाई घाम सs नहा गेला |हम कहलियैन भाई छोरी दियौ अहन सs नै  हात , से ओ किया मानता आब तs इज्जत के सवाल भ गेलैन| हम उम्हर सs हटि क कनि  दोसर जगह टहलि देलौ,बगल में मंदिर छल, दर्शन क आधा घंटा बाद अबै छि तs  हुनक हालत देखि कs हंशी छुटि गेल &#8212; हुनक शरीर पर वस्त्र के नाम पर मात्र  गमछा दृष्टिगोचर भ रहल छल| आ निचा में बैश क कराहि रहल छला | हम पुछलीयें  की भेल यौ ? हुनक जवाब छल &#8211; भाई आब हम काने पकरै छि जे खेत &#8211; खलिहान दिस  जाब, हुनका हाथ स शोणित के धारा बही रहल छल | कारन जे हुनक अंगूठा पर खुरपी  के तेज धार अपन कमाल देखा चुकल छल| जेना तेना हुनक प्राथमिक उपचार क घर  पहुँचलौ|<br />
मुदा धन्य छथि आजूक नवयुवक वर्ग आ हुनक नव फैसन |</p>
</div>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://mithilablog.com/2010/12/22/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%b0-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%95/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>बुजूर्ग</title>
		<link>http://mithilablog.com/2010/12/22/%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%9c%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/</link>
		<comments>http://mithilablog.com/2010/12/22/%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%9c%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/#comments</comments>
		<pubDate>Wed, 22 Dec 2010 05:06:29 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Mithila Blog</dc:creator>
				<category><![CDATA[कटौझ]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://mithilablog.com/?p=6</guid>
		<description><![CDATA[
सर्वप्रथम हम राजीव मिश्र MithilaBlog.com के तरफ सs नमस्कार करैत छि, आ  संगहि अहाँ सब पाठकवृन्द हेतु मंगल कामना कs रहल छि &#124;हम पहिले एहि साईट के  बारे में किछु व्यक्त करबाक आज्ञा चाहैत छि &#8212; ओना तs एहि वेबसाइट के नामे  में एकर व्याख्या संहित अछि , तत्पश्चात इ एकटा एहन जगह अछि [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div>
<p>सर्वप्रथम हम राजीव मिश्र MithilaBlog.com के तरफ सs नमस्कार करैत छि, आ  संगहि अहाँ सब पाठकवृन्द हेतु मंगल कामना कs रहल छि |हम पहिले एहि साईट के  बारे में किछु व्यक्त करबाक आज्ञा चाहैत छि &#8212; ओना तs एहि वेबसाइट के नामे  में एकर व्याख्या संहित अछि , तत्पश्चात इ एकटा एहन जगह अछि जतs हम सभ  मिथिलांचल वासी अपन मुनक बात लिखी सकैत छी आ अपन विचार सs सभ गोटे के अवगत  करा सकैत छी| क्षमा करब आब कनि विषय वस्तु पर एबाक चाही &#8212; गाम घर में  देखैत हेबई जे किछु उलांक जकरा हम सब उद्दंड सेहो कही सकैत छियै, छौरा सब  होइत अछि | एहिना हमरा गाम में सेहो किछु सज्जन छथि(सज्जन मतलब ऊपर जिनका  बारे में बताल गेल अछि)| हम चौक पर ठार रही हमरा बगल में ३ टा बुजुर्ग बैसल  छला- नसीब बाबु , कृपा बाबु, तिरपित बाबु | संयोग सs तीनू गोते सहोदर छला |  उम्हर सs एकटा सज्जन एला (जिनकर नाम हम नै लेब चाहब नै त माइर भs जात) आ  कहै छैथ- यौ राजीव एकटा बात बुझलिया &#8211; की ? हमर प्रश्न छल| एह आई त गजब भs  गेलै | एहन की यौ ? त ओ खूब जोर सs कहै छैथ नसीब के कृपा सs तिरपित तृप्त  भs गेला |<br />
आब तs ओत ठार सब गोटे खिलखिला कs हंसी देलैथ| आ जखने ओई सज्जन के नजर ओई  तीनू बुजुर्ग पर परलैन तs हुनकर थोबरा &#8212;&#8212;&#8212;- आह देख बला छल |तs एहन  होइत अछि आब अप्पन मिथिलांचलक बर बुजुर्ग के संग, चलू एत तक तs ठीक अछि  मुदा आब जे एकटा कथानक लिखी रहल छी ओ पढ़ी क अहाँक मून अवश्य उद्वेलित भs  उठत &#8212;&#8211;<br />
हमर घरक बगल में एकटा छथिन्ह हलधर बाबा, अपना समय के मानल विद्वान, एखन  हुनक उम्र ८० के आस &#8211; पास हात |घर स किछु दूर मुदा हमर मित्र जिनक नाम आलोक  छैन के घरक पांछा में एकटा पैघ मैदान छैक |बाबा ओहि मैदान में साँझक समय  पोखरि दिस होअ गेला |संयोग एहन जे ओ आलोक के घरक नजदिके में बैसी गेला  |आलोक के नजर परलैन |आब हुनका पता नै की फुरेलैन कहै छथिन्ह &#8211; बाबा भेल त  उठू ने |साँझक समय बाबा के आंखि कमजोर हुनका सुनाई त देलकैन मुदा किछु  देखाई नै देलकैन जे के कतs सs बजी रहल अछि? बाबा अनठिया कs फेर पूर्ववत अपन  काज करs लगला |कनि देर बाद आलोक फेर कहलखिन्ह बाबा भेल तs उठू ने ! आब  बाबा ठार भs गेला आ घूमी &#8211; घूमी क आवाजक श्रोत खोजबाक प्रयत्न करs लगला,  मुदा हुनका के देखाई देतेन| बाबा फेर बैसि गेला &#8211; मुदा आलोक कहाँ मान बला ५  मिनट बाद फेर स अपन वाक्य दोहरेला &#8211; बाबा एखन तक नै भेला, भ गेल त उठू ने |  आब हलधर बाबा के सब्र टूटी गेलैन ओ अग्निस्च- वायुस्च भ बजला &#8211; रे सरवा  बंसलोचन भ जात त हम अपने उठी जाब ने |आ विस्फोट करs बला अंदाज में बजला &#8211; इ  जे बुझैत हेबs जे हम नै देखालियौ से भूल छs |<br />
आ सही में एहि गप्पक सबूत में आलोक के प्रात भेने मिल गेलैन जखन हुनक घर पर उपराग एलैन|<br />
एहन एहन आलोक कतेको होइत छथि जिनका वृद्ध लोकनी के परेशान करबा में वा हुनक  खिल्ली उरबा में मज़ा अबैत छैन मुदा कनिको इ नै सोचै छथि जे जिनका पूजा  करबा चाही हुनका साथ हम दुर्व्यवहार कs रहल छी |</p>
<p>एकटा श्रवण कुमार छलैथ जे अप्पन वृद्ध माता- पिता के कन्हा पर तीर्थाटन करेला आ एकटा &#8212;&#8212;&#8212;- कुमार छैथ</p>
<p>जे &#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;</p>
<p>धन्यवाद ,</p>
</div>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://mithilablog.com/2010/12/22/%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%9c%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
	</channel>
</rss>

